मुझे माफ कर देना

आदत.. मुस्कुराने की मुझे माफ कर देना उतर सकी न पूरी तेरी मुहब्बत के क्षितिज पर हाँ, मुझे ले बैठा लज्जा, शर्म और बदनामी का डर जो किए थे वादे निकले रेत के टीले या पानी पे खींची लकीर जो तुम समझो क्षमा चाहती हूँ, जो, तेरे लिए जमाने से मैं लड़ न सकी कदम से कदम और कंधे से मिला... [पूरी पोस्ट]
writer संजय भास्कर

kavita

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[07 May 2010 07:21 AM]

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