गाँव के पास अब हाट नहीं लगते..

मीत गोबर से लिपे हुए आंगन नहीं दिखते..गाँव के पास अब हाट नहीं लगते..न कहीं, पेड़ों पे आम की बौर है.न नदी के पानी का मध्यम सा शोर है.वो चिमटा, वो फूकनी, वो चूल्हा कहाँ है?अब तो बस पेट्रोल और डीजल का धुआं है.डाली पे अब कहीं झूले नहीं टांगते..गाँव के पास अब हाट... [पूरी पोस्ट]
writer मीत
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[07 May 2010 06:56 AM]

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