निरूपमा हम तुम्हारी माफी के हकदार भी नहीं

दिल-ए-नादाँ सोचा नहीं था कि नए लैपटाप पर कुछ लिखते हुए इस तरह हाथ कांपेगा। 29 अप्रैल 2010 वो तारीख थी जिस दिन निरूपमा पाठक नामक एक युवा सपने का असामयिक अंत हुआ था। वो भी किसके हाथों! उसके घरवालों ने उसकी महज इसलिए हत्या कर दी क्योंकि वह एक लड़के से शादी करना चाहती... [पूरी पोस्ट]
writer संदीप पाण्डेय
views
24
upvote
0
downvote
1
rating
-1
comments
7
[07 May 2010 06:40 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix