सहूलतें सभी आसाइशों की यकजा हैं
सहूलतें सभी आसाइशों की यकजा हैं।हमारे बच्चे घरों में भी रह के तनहा हैं॥तमाम रिश्ते ही आपस के जैसे टूट गये, तकल्लुफ़ात की ख़ोलों में अहले-दुनिया हैं॥जदीद ज़हनों के सब ज़ाविए हैं रस्म-शिकन,मगर तनाव के हर मोड़ पर शिकस्ता हैं॥ सज़ाए-मौत का है झेलना बहोत...
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युग-विमर्श
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[07 May 2010 05:00 AM]



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