सांसदों की एक और बल्ले-बल्ले

चिट्ठानामा sansadji.comजैसीकि रघुकुली रीति सदा चलि आई है....संसद के भीतर या बाहर जनहित की कम, अपने हित की बातें ज्यादा हो रही हैं। मसलन, सांसद जी की तनख्वाह बढ़ी की नहीं बढ़ी, सांसद निधि पर कोर्ट ने क्या फैसला दिया, केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए सांसद कोटा... [पूरी पोस्ट]
writer मुंहफट

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[07 May 2010 03:41 AM]

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