सफ़र का सारा मंज़र सामने था
सफ़र का सारा मंज़र सामने था।कहीं बच्चे कहीं घर सामने था्। हमें जो ले गया मक़्तल की जानिब, थका-माँदा वो लश्कर सामने था॥मिली थी नोके-नैज़ा पर बलन्दी,मैं हक़ पर था मेरा सर सामने था।फ़ना के साहिलों से क्या मैं कहता,बक़ा क जब समंदर सामने था॥तलातुम मौजे-दरिया...
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[07 May 2010 01:06 AM]



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