…एक ब्लागर की डायरी
स्थान: एक रद्दी की ठेलिया।
पात्र: रद्दी की ठेलिया पर मौजूद कुछ फ़टी-पुरानी डायरियां।
मौसम: कुछ चिपचिपा सा ही कहना चाहिये।
समय: अब छोडिये सब पूछ लेगें का? कुछ तो निजता का सम्मान करिये।
माहौल: ये दिल मांगे मोर वाला।
सुबह से घर में पचीस बार बताया जा चुका है...
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फ़ुरसतिया
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[07 May 2010 01:11 AM]



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