अश्क कैसे बहाऊँ?

एक प्रयास तेरी याद मेंजब अश्कों का दरिया बहता थातब अंतस में बैठा तू ही तो तड़पता थाआज तेरा ये अंदाज़ समझ आया है जब मैं और तूदो रहे ही नहीं जब तू ही वजूदमें समाया है हर ओर तेरा हीनूर समाया है जहाँ मेरा "मैं"ना नज़र आता है जब एकत्व... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[07 May 2010 01:06 AM]

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