1411 बाघ और 11 हिंदी चिट्ठा चिन्तक

हथकढ़ कल रात को पीने के लिए वोदका का एक पैग ही बचा था। रूस की इस देशी शराब को मैं ज्यादा पसंद नहीं करता हूँआधी रात होते ही उतर जाया करती है फिर भांत - भांत के बेहूदा सपने देखते हुए सुबह हुआ करती है। आज विस्की के बारे में सोच रहा हूँ । सोचने का क्रम अभी टूटा... [पूरी पोस्ट]
writer hathkadh@gmail.com
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[06 May 2010 09:51 AM]

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