ना-खुदा मैं शायद तेरा न था
भाई, तुम अगर होतेतो शायद झगड़ कर घुन्ना बने बैठे होते हम एक दुसरे सेलेकिन तुम मर चुके हो बरसों पहलेऔर मेरे लिए तुम अब बस एक विषय रह गए होक्या कुछ और भी संभव थाजबकि न मैं तुमसे कभी मिलान देखा तुम्हें ?महेन की ये पंक्तियाँ मन को आलोड़ित कर देती है. बचपन...
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hathkadh
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[22 Mar 2010 00:22 AM]



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