कितने साये याद करूँ
दसों दिशाओं में आग बरसती है.रेत के सहरा में उठते हैं धूल और स्मृतियों के बवंडर. सन्नाटा पसर जाता है धुली हुई चादरों की तरह. घड़ी भर की छाँव में याद की पोटली से निकली कुछ हरे रंग की चूड़ियाँ, लू को थोडा सा विराम देती है. एक पीले रंग का ततैया पानी की...
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hathkadh
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[24 Apr 2010 02:10 AM]



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