जियें तो जहाँ में दिमित्रोफ़ होकर

हथकढ़ कल का दिन बहुत उमस भरा था. मौसम में आर्द्रता बढ़ रही होगी वरना नम भीगी आँखों की नमी महसूस करने के दिन अब कहाँ है. ऐसे दिनों में ये बहुत पहले की बात नहीं है जब किसी राह से गुजरते हुए इंसान को उदास देख कर ही लोग उदास हो जाया करते थे. मन उन दिनों गीले थे.... [पूरी पोस्ट]
writer hathkadh
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[02 May 2010 00:31 AM]

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