स्त्री विमर्श की किंवदंती पाकिस्तान चली गयी, तनहा कवि अब दीवारों से सर फोड़ता होगा

हथकढ़ कवि के लिए दो ख़िलाफ़त भरे शब्द कोई कह दे तो उसके चमचे कांव - कांव करते हुए सर पर मंडराने लगते हैं, यही एक कवि के सफल और महान होने की पुष्टि का एक मात्र तरीका भी है. मेरी एक परिचित ने जब दूज वर चुना तो मुझे पहले हेमा मालिनी से लेकर करिश्मा और फिर सानिया... [पूरी पोस्ट]
writer hathkadh
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[06 May 2010 11:59 AM]

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