"मनुष्य का विकास" - यादवचंद्र के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" का द्वितीय सर्ग
प्रथम सर्ग ; धऱती माता' (पूर्वार्ध) प्रथम सर्ग "धऱती माता" (उत्तरार्ध)अनवरत के पिछले अंकों में आप यादवचंद्र जी के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" के प्रथम सर्ग धरती माता का पूर्वार्ध और उत्तरार्ध पढ़ चुके हैं। इन दोनों कड़ियों को ऊपर दिए गए लिंक...
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दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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[06 May 2010 19:36 PM]



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