सीमाओं के साथ जीना

ज्ञानदत्त पाण्डेय की मानसिक हलचल हम चाहें या न चाहें, सीमाओं के साथ जीना होता है। घाट की सीढियों पर अवैध निर्माण गंगा किनारे घूमने जाते हैं। बड़े सूक्ष्म तरीके से लोग गंगा के साथ छेड़ छाड़ करते हैं। अच्छा नहीं लगता पर फिर भी परिवर्तन देखते चले जाने का मन होता है। अचानक हम देखते हैं कि कोई... [पूरी पोस्ट]
writer ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey

Ganges

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[06 May 2010 18:30 PM]

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