प्रेम और अंहकार

स्वार्थ समय रहते एक बार तो जवाब दे दो मेरी पुकार का| बाद में ऐसा ना हो समय उलझा ले अपनी व्यस्तता के जाल में मुझे| और विवश मै चाहकर भी तुम्हारी आवाज ही न सुन पाँऊ |... [पूरी पोस्ट]
writer swaarth

poetryLifeahamkarego

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[06 May 2010 16:28 PM]

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