नाख़ून क्यों बढ़ते हैं : हजारी प्रसाद द्विवेदी

bat-bebat मेरी छोटी लड़की ने उस दिन पूछ दिया कि आदमी के नाख़ून क्यों बढ़ते हैं तो मैं कुछ सोच ही नहीं सका. जब आदमी जंगली था, वनमानुष जैसा, उसे नाख़ून की जरूरत थी. जंगल में वही उसके अस्त्र थे. दांत भी थे पर नाख़ून के बाद ही उसका स्थान था. उन दिनों उसे जूझना पड़ता था,... [पूरी पोस्ट]
writer डा.सुभाष राय
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[06 May 2010 15:56 PM]

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