shabdon ke akshat

shabdon ke akshat ना ----मै --------नी -------बोलना ----जब भी सोंचती हूँअब मेँ चूप रहूंगी ,तबमन की चंचलता हिलोले ल्रती हैआदतों का बचपना पुकारने लगता हैआशाओं का स्वप्न संवरने लगता हैभावनाओं का ज्वार उफनने लगता हैआखों का जल छलकने लगता हैऔर तब ,ना चाहते हुए भीएक... [पूरी पोस्ट]
writer swati
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[06 May 2010 12:36 PM]

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