बाला...नये रूप में.......`तेज`

साहित्य योग वैसे हाला और मधुशाला पर बहुत कुछ लिखा गाया है पर मेरी कोशिश आज यहाँ मधुशाला को दूसरे रूप में जिन्दा करना है."बाला" जो की यहाँ "मन" के रूप में होगी, "मधुशाला" "देवाला" और "हाला" "माला" के रूप में. मैंने "बाला" पर जादा जोर दिया है, की वह क्यों देवाला जाती... [पूरी पोस्ट]
writer Tej Pratap Singh
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[06 May 2010 13:06 PM]

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