रोज की एक कविता....आखिर कैसी

Voice Of Heart : पुकार - अंतर्मन की मै कुछ दिनों से खुद को ढूंढ रहा हूँ.. हाँ शायद बेवकूफी है पर क्या करूं मै हूँ ही जरा सनकी व्यक्तित्व,, बस धुन लग जाती है कोई तो उसी को पकड़ के बैठ जाता हूँ.. कोई नहीं इसका अपना अलग ही मजा है.. लिखना अच्छा लगता था बहुत पहले से, लिखने लगा.. कुछ शायरी २ लाइन... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु पन्त
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[06 May 2010 13:22 PM]

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