‘‘उल्लू’’ (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
उल्लू का रंग-रूप निराला।लगता कितना भोला-भाला।।अन्धकार इसके मन भाता।सूरज इसको नही सुहाता।।यह लक्ष्मी जी का वाहक है।धन-दौलत का संग्राहक है।।इसकी पूजा जो है करता।ये उसकी मति को है हरता।।धन का रोग लगा देता यह।सुख की नींद भगा देता यह।।सबको इसके बोल...
[पूरी पोस्ट]
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
12
4
0
4
6
[06 May 2010 12:30 PM]



Shuffle







