ग़ज़ल(बूढी डायरी उपन्यास से)
Share इस कहानी का बूढ़ा नायक दीवाली पर अपना पुराना बक्सा खोलता है और उसमें रखा पुराना सामान देखकर उसे अपने बीते वक्त की याद आ जाती है तब वो यह ग़ज़ल अपनी डायरी में लिखता है-सोचा था जो बीत गए वो बरस नहीं फिर आएंगेआज पुराना बक्सा खोला तो देखा सब...
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माणिक
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[06 May 2010 11:17 AM]



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