ग़ज़ल(बूढी डायरी उपन्यास से)

अशोकनामा Share  इस कहानी का बूढ़ा नायक दीवाली पर अपना पुराना  बक्सा खोलता है और उसमें रखा पुराना सामान देखकर उसे अपने बीते वक्त की याद आ जाती है तब वो यह ग़ज़ल अपनी डायरी में लिखता है-सोचा था जो बीत गए वो बरस नहीं फिर आएंगेआज पुराना बक्सा खोला तो देखा सब... [पूरी पोस्ट]
writer माणिक
views
13
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[06 May 2010 11:17 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix