बड़बड़झाला
कह कहे साहब हमारे लाट, कुछ ना झाम करना बंधु, आईन्दा से, केवल काम के ही काम करनाक्या धरा है? तेज धारा है, समय की है गति दृतमानशामें शोख, हैं दिन धूम, धरती है नगर परिधान क्या है देखनी, जो रात-बीती, बात-बीती, बुझ गई बत्ती जला ले, रोशनी कर, देख बाकी घूमते...
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जोशिम
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[06 May 2010 11:19 AM]



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