घूँघट
दोस्तो आज कुछ हट के लिखने की कोशिश की है...आशा है इसे पढ कर आनंदित होंगे...असल में किसी ने पेशकश की कि सुहागरात या घुंघट पर कोई रचना लिख कर भेजे..तो हमने क्या खुद को किसी से कम समझना था, बैठ गये दिमाग की कलम घिसने और जो जो लफ्जो की उठा-पटक हुई वो इस रचना...
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अनामिका की सदाये......
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[06 May 2010 10:04 AM]



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