कौन बहार बिखेर गया...!

Vedika सूने से मन आंगन में मेरेये कौन रंगोली उकेर गया....पतझर तो था अभी-अभीफिर कौन बहार बिखेर गया...अपना तो नही था, झौंकाशायद माथे हाथ फेर गया....लौट आये वो लम्हा देखूंजो पहले कुछ देर गया ....वेदिका... [पूरी पोस्ट]
writer वेदिका
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[06 May 2010 08:46 AM]

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