शहर में गालिब की आबरू क्या है

हलफ़नामा गरीबी का अपना एक अलग सौन्दर्य होता है- ऐसा सुना है । आजकल देख रहा हूं । सौन्दर्य भी ऐसा कि कलेजा मुंह को आता है और हाथ हड़बड़ाहट में कलेजे तक जाता है। पूरा मोहल्ला उसे देखने की बाट जोहता रहता है। दिख जाए तो आफत ना दिखे तो आफत । बस यूं समझें कि कमबख्त दिल... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभात रंजन
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[06 May 2010 08:23 AM]

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