'आज फिर..'
..."जुड़े हैं कांटें..जीवन में ऐसे..ना फांस निकलती है..ना लहू के कतरे..तुम तो..बस छुअन से..समा बाँध देते थे..मेरी कश्ती गहराई से..उबार दो..आज फिर..!"......
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Priyankaabhilaashi
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[06 May 2010 07:53 AM]



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