"कसब को दे दी गयी फांसी की सज़ा...तो ? इसमें खुश होने की क्या बात है ?"
क्या ज़बरदस्त शोर शराबा मचा रखा है पूरे मीडिया है ...हरेक की दूकान धड़ल्ले से चल रही है ....अपने अपने टी आर पी के चक्कर में जितने भी सनसनीखेज़ शीर्षक हो सकते थे ..जितने भी फ़िल्मी टोन की पंच- लाइन हो सकती थी उन सबका सहारा लेकर ...हर टी वी चैनल अपना अपना...
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रोमेंद्र सागर
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[06 May 2010 06:29 AM]



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