गाते गाते रोएं क्यूं ...चिल्लाने क्यूं न लगें !

टूटी हुई बिखरी हुई जब बात निकली तो शुरू में कई लोग बड़े चिंतित दिखे लेकिन अब धीरे-धीरे ज़्यादातर लोग यही साबित कर रहे हैं कि भाई हमें मत घसीटो क्योंकि हमको आल इंडिया रेडियो से अक्सर चेक लेने जाना होता है. जोर से बोलने में आज कल गले पर जोर पड़ता है.इसलिए फुसफुसाओ, बल्कि... [पूरी पोस्ट]
writer इरफ़ान
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[06 May 2010 05:21 AM]

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