नारी

गीत सुनहरे नारी सौंदर्य भरा अनंत अथाह,इस सागर की कोई न थाह .कैसे नापूँ इसकी गहनता,अंतस बहता अनंत प्रवाह .ज्योति प्रभा से उर आप्लावित,प्राण सहज करुणा से द्रावित .अंतर्मन की गहराई में,प्रेम जड़ें पल्लव विस्तारितसरल हृदय संपूर्ण समर्पित,कण- कण अंतस करती अर्पित .रोम -... [पूरी पोस्ट]
writer Kavi Kulwant

नारी

views
13
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
7
[06 May 2010 04:53 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix