और यूँ हमारी एक-आध धड़कन और बढ़ जाती है!

kunwarji's कई बार जिंदगी बहुत करीब से गुजर जाती है,अनजाने में हमें जिन्दा होने का एहसास करा जाती है,मौत हमें एक बार फिर से मारने में शरमाती है,और यूँ हमारी एक-आध धड़कन और बढ़ जाती है!भावो और शब्दों की लड़ाई आँखों से झड़ जाती है,समय की पेशानी पर कुछ सलवटें और पड़... [पूरी पोस्ट]
writer kunwarji's

Hindi poem

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[06 May 2010 04:34 AM]

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