मितानी के गांठ - कहिनी

गुरतुर गोठ दाई-दाई! मेंहा काली सलमा दीदी घर रहूं। दीदी ह मोला काली रूके खातिर बड़ किलोली करत रीहीस हे। बड़े बाबू ह घलोक रूके बर मनावत रीहीसे। ममता ह अपन दाई ल चिरौरी करत कहिथे। त दाई ह कथे- तेहां मोला झिन पूछ बेटी, तोर ददा ल जाके बता। ममता ह गांव के पंच कातिक के... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

रीझे यादव

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[06 May 2010 03:46 AM]

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