आओ शर्म से डूब मरें (अविनाश वाचस्पति)
आज दिनांक 6 मई 2010 के दैनिक जनसत्ता में संपादकीय पेज 6 पर दुनिया मेरे आगे स्तंभ में वैभव दांगट ने जो सच्चाई ब्यां की है, आओ चिंतन करें कि क्या यह शर्म से डूब मरने वाली बात नहीं है ? क्यों पैसे के आगे कुछ भी दिखलाई देना बंद हो गया ? एक साथ कई...
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अविनाश वाचस्पति
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[06 May 2010 02:57 AM]



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