छाज तो बोले, छलनी भी क्या बोले, जिसमें सत्तर छेद
आज मैं अन्तर सोहिल शिकायत लेकर आया हूं, श्री नवीन जोशी जी के लिये। राज भाटिया जी तकरीबन 30 वर्षों से विदेश में रह रहे हैं। उनको जर्मनी की नागरिकता मिली हुई है। फिर भी हिन्दी भाषा के प्रति उनका प्रेम और लगाव देखकर मन उनके लिये श्रद्धा से झुक जाता...
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अन्तर सोहिल
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[06 May 2010 01:53 AM]



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