'अपराध उद्योग' को हार्दिक शुभ-कामनाये !
वोये, लख-लख बधाईयाँ तेनु "नेताजी", "भाई", "गुरु", 'उस्ताद" और 'बोस" जी ! अब तो आपके उद्योग के लिए देश की सर्वोच्च न्यायालय की ओर से भी एक और रियायत मिल गई है ! अब देखना चंद हफ़्तों में ही आपकी कम्पनियों के शेयर किन ऊँचाइयों को छूंते है !यह तो थी इस...
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पी.सी.गोदियाल
tirchinazar
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[06 May 2010 01:01 AM]



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