गीत : जब - तब --संजीव 'सलिल'
गीत : जब - तब संजीव 'सलिल' अभिषेक किया जब अक्षर का, तब कविता का दीदार मिला.शब्दों की आराधना करी-तब भावों का स्वीकार मिला.जब छंद बसाया निज उर में तब कविता के दर्शन पाये.पर पीड़ा जब अपनी समझीतब जीवन के स्वर मुस्काये.जब वहम अहम् का दूर हुआतब अनुरागी मन...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
contemporary hindi poetry
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[06 May 2010 00:45 AM]



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