संत कबीर दास के दोहे-गुरु के लिए अधिक संपत्ति जोड़ना खतरनाक (kabir ke dohe-sant aur sanpatti)

दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका माया दासी संत की साकट की शिर ताजसाकुट की सिर मानिनी, संतो सहेली लाज संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि माया तो संतों के लिए दासी की तरह होती है पर अज्ञानियों का ताज बन जाती है। अज्ञानी लोग का माया संचालन करती है जबकि संतों के सामने उसका भाव विनम्र होता... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिन्दू-धर्म

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[05 May 2010 23:35 PM]

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