निरुपमा...तुम खबर नहीं बन सकती !
आज मेरी जुबान लड़खड़ा रही है। मेरे गले से शब्द नहीं निकल रहे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपने बीच से ही किसी को खबर बनते देखूंगा। कल तक जो निरुपमा मेरी एक दोस्त हुआ करती थी और दोस्त से ज्यादा मेरे करीबी दोस्त प्रियभांशु की होने वाली जीवनसंगिनी यानि हमारी...
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सुबोध
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[05 May 2010 23:27 PM]



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