निरुपमा...तुम खबर नहीं बन सकती !

उम्मीद है आज मेरी जुबान लड़खड़ा रही है। मेरे गले से शब्द नहीं निकल रहे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपने बीच से ही किसी को खबर बनते देखूंगा। कल तक जो निरुपमा मेरी एक दोस्त हुआ करती थी और दोस्त से ज्यादा मेरे करीबी दोस्त प्रियभांशु की होने वाली जीवनसंगिनी यानि हमारी... [पूरी पोस्ट]
writer सुबोध
views
36
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
0
[05 May 2010 23:27 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix