कौटिल्य दर्शन-डरपोक की संगत करना भी ठीक नहीं
प्रकृतिभिर्विरक्तप्रकृतिर्युधि।सुखाभियोज्यो भवति विषयेऽप्यतिसक्तिमान्।।हिन्दी में भावार्थ-विरक्त प्रकृति वाले राजा को उसके लोग युद्ध में ही छोड़कर चले जाते हैं और विषयों में आसक्त पुरुष को थोड़ा सुख देकर ही जीत लिया जाता...
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दीपक भारतदीप
astha
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[05 May 2010 23:18 PM]



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