आग से खेल वे
आग से खेल वे दुःख से न पिघल जायेंगे |हमसे आशाओं के राज बताए न गएजो चले अरमान लिए वे जल के राख हुएराख छोडो न कहीं शोले ही दाहक जायेंगे || आग.....हमने तक़दीर के नक्शों में नए रंग भरेगीत जीवन के बजाए स्वर के जाम ढलेराग छोड़ी जो वही यमराज बहक जायेंगे ||...
[पूरी पोस्ट]
क्षत्रिय
10
0
0
0
3
[05 May 2010 22:06 PM]



Shuffle








