तुम न आये

Unmanaa आज भी प्रिय तुम न आये,और मैं बैठी अकेली राह में पलकें बिछाये ! आज भी प्रिय तुम न आये !सप्त ऋषियों ने गगन में आज वन्दनवार बाँधे,सोहता मंगल कलश सा धवल चन्दा मौन साधे,जोहती हूँ बाट प्रियतम नयन में आँसू छिपाये ! आज भी प्रिय तुम न आये ! खिल उठी है रातरानी गंध... [पूरी पोस्ट]
writer Sadhana Vaid
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[05 May 2010 21:22 PM]

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