टुकड़ा टुकड़ा आसमान

नारी का कविता ब्लॉग © 2008-10 सर्वाधिकार सुरक्षित!अपने सपनों को नई ऊँचाई देने के लियेमैंने बड़े जतन से टुकड़ा टुकडा आसमान जोडा था तुमने परवान चढ़ने से पहले ही मेरे पंख क्यों कतर दिये माँ ?क्या सिर्फ इसलिये कि मैं एक बेटी हूँ ? अपने भविष्य को खूबसूरत रंगों से चित्रित करने के... [पूरी पोस्ट]
writer Sadhana Vaid
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[05 May 2010 21:29 PM]

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