मैं साधू
मैं साधू था चला साधने, जीवन के गलियारों को मंजीरा हथियार बना, केसरिया ध्वज फहराने को जटा सुशोभित मस्तक पर है, प्रकाश पुंज फैलाने को मैं साधू था चला मापने, इश्वर के पैमाने को विलासिता का सर्प भगा वैराग्य ध्वनि गुंजाने को मैं साधू था चला बंधने,...
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Vishal Kashyap
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[05 May 2010 20:15 PM]



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