तारो की रौशनी में

A poetess blog कभी कभी तनाव से ऊब करनींद जब पल्लू छुड़ा कर भागती हैतो मै रोकती नहीं उसका रास्ताये सोच कर की शायदकहीं कोई मखमली सपने की सेज परकरता होगा उसका इंतज़ारऔर चुपचाप चुनने लगती हूँआसमान के सितारेक्योंकि दिन के उजालेकई बार आँखों को चौंधिया देते हैंऔर साफ़ दिखती हुई... [पूरी पोस्ट]
writer ranjana
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[05 May 2010 16:07 PM]

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