तारो की रौशनी में
कभी कभी तनाव से ऊब करनींद जब पल्लू छुड़ा कर भागती हैतो मै रोकती नहीं उसका रास्ताये सोच कर की शायदकहीं कोई मखमली सपने की सेज परकरता होगा उसका इंतज़ारऔर चुपचाप चुनने लगती हूँआसमान के सितारेक्योंकि दिन के उजालेकई बार आँखों को चौंधिया देते हैंऔर साफ़ दिखती हुई...
[पूरी पोस्ट]
ranjana
16
2
0
2
8
[05 May 2010 16:07 PM]



Shuffle








