जैन साहित्य इतिहास -25
अब तक आपने पढ़ा ...... ३-स्थानांग (ठाणांग) -यह श्रुतांग दस अध्ययनों में विभाजित है, और उसमें सूत्रों की संख्या एक हजार से ऊपर है। इसकी रचना पूर्वोक्त दो श्रुतांगों से भिन्न प्रकार की है। यहां प्रत्येक अध्ययन में जैन सिद्धान्तानुसार वस्तु-संख्या गिनाई गई...
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[05 May 2010 15:54 PM]



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