संकल्प

shabdon ke akshat हम भी बुन लेते हैंसंकल्पों के जाले,ठीक उस मकड़ी की तरहजो घर का सपना देखतीउलझ जाती है ,स्वयं के बुने जालों मेंहमारे स्वप्नों के ये जालमहीन तारों से बुने होते है ,चटक रंगों ,रेशमी तारों के वावजूद,जकडन की चिपचिपाहटफंस जाने की उकताहट सेमुक्त होनेकी छात्पताहत... [पूरी पोस्ट]
writer swati
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[05 May 2010 13:36 PM]

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