shabdon ke akshat

shabdon ke akshat जीवन उत्सवऐसे भी पल आये जीवन मेंअखिंयाँ रह गयी ठगी ठगीमन अचरज से भर आयातन लहराया गंध -सुगंध साजीवन उत्सव कहलायाऐसे भी पल आये जीवन मेंमन उपवन -सा महकायादीप्त शिखा का उज्जवलएक स्वप्न -सा उभर आयामुक्त का सीपी से हो बंधनऐसा ही बंधन बंध आयाऐसे भी पल आये जीवन... [पूरी पोस्ट]
writer swati
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[05 May 2010 13:23 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix