shabdon ke akshat
जीवन उत्सवऐसे भी पल आये जीवन मेंअखिंयाँ रह गयी ठगी ठगीमन अचरज से भर आयातन लहराया गंध -सुगंध साजीवन उत्सव कहलायाऐसे भी पल आये जीवन मेंमन उपवन -सा महकायादीप्त शिखा का उज्जवलएक स्वप्न -सा उभर आयामुक्त का सीपी से हो बंधनऐसा ही बंधन बंध आयाऐसे भी पल आये जीवन...
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swati
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[05 May 2010 13:23 PM]



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