अमन के हम पहरुए है, हमारा काम चलना है,
बस्तर अशांत है, हिंसा का खेल खेलने वाले नक्सलियों के कारण. नक्सली विकास की बात करते है और हमेशा विनाश के दृश्य उपस्थित करते है. अरुंधती राय जैसी लेखिकाएं और कुछ छद्म बुद्धिजीवी नक्सलियों को महिमामंडित करते रहते है, जबकि नक्सलियों की हरकतें केवल निंदनीय...
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girish pankaj
सवक्तव्य- गीत
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[05 May 2010 12:41 PM]



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