फिर एक कविता.....
कविता पे एक कविता..... क्या क्या लिख जाते हैं हम लोग कविता मे... या कविता होती कैसी है..... या कैसे बनती है... वही लिख दिया.... फिर एक कविता.....उन दर्दों को फिर आज सुनाने का दिल करता है,आज फिर एक कविता लिख जाने को दिल करता है.बारिश की बूदें हों या वो...
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हिमांशु पन्त
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[05 May 2010 12:53 PM]



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