नदी के तट से देखा हमने - आत्म प्रकाश शुक्ला ( प्रसिद्द गीतकार )

HPSHARMA नदी के तट से देखा हमने ऐसा अनगिन बार हुआ,तैरने बाला डूब गया था डूबने बाला पार हुआ।जेहन की खिड़की खोलके हमने जब-जब झांका जीवन में,अपने अहम् को अपने कद से ऊंचा आँका जीवन में।इतनी जेहनी हुई जिन्दगी जीना तक दुस्वार हुआ,तैरने बाला डूब गया था डूबने बाला पार... [पूरी पोस्ट]
writer हरि शर्मा
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[05 May 2010 12:13 PM]

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